Attero Story: इलेक्ट्रॉनिक वेस्ट से 300 करोड़ की कंपनी बना डाली, जानिए कैसे

2008 में, गुप्ता भाइयों, नितिन और रोहन, के सामने एक आम समस्या आई - अपने पुराने लैपटॉप को जिम्मेदारी से फेंकने का झंझट।

इस अनुभव ने उन्हें उस समय भारत में इलेक्ट्रॉनिक कचरे के निपटान की अव्यवस्थित व्यवस्था को समझने का मौका दिया।

2008 में, Attero Recycling का जन्म हुआ और भारत में इलेक्ट्रॉनिक कचरे के रीसाइक्लिंग के क्षेत्र में क्रांति लाने का सफर शुरू हुआ।

Attero की शुरुआत आसान नहीं थी। भारत में इलेक्ट्रॉनिक कचरे के रीसाइक्लिंग का बाजार अपरिपक्व था और जागरूकता भी कम थी।

हालांकि, गुप्ता भाई दृढ़ थे। उन्होंने शोध और विकास में भारी निवेश किया, विशेषज्ञों की एक टीम बनाई, और सरकार के साथ सहयोग किया।

वर्तमान वित्त वर्ष (FY23) के लिए कंपनी की रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने अब तक लगभग 300 करोड़ रुपए के राजस्व का उत्पन्न किया है, और इस आंकड़े की वृद्धि आगे की ओर हो रही है।

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